झारखंड बंद आज: पड़हा राजा सोमा मुंडा हत्याकांड को लेकर आदिवासियों में उबाल, लोहरदगा में निकला मशाल जुलूस

January 17, 2026
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लोहरदगा/रांची: लोहरदगा जिले में पड़हा राजा सोमा मुंडा की नृशंस हत्या और आदिवासी पारंपरिक अधिकारों के मुद्दे को लेकर पूरे राज्य में आक्रोश व्याप्त है। विभिन्न आदिवासी संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार शाम लोहरदगा की सड़कों पर एक विशाल मशाल जुलूस निकाला गया। इसी क्रम में, अपराधियों की गिरफ्तारी और न्याय की मांग को लेकर संगठनों ने आज (शनिवार) 'झारखंड बंद' का आह्वान किया है।

प्रमुख मांगें और विरोध के मुख्य बिंदु; आदिवासी संगठनों ने सरकार और प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

अविलंब गिरफ्तारी: सोमा मुंडा हत्याकांड के दोषियों को जल्द से जल्द पकड़कर कड़ी सजा दी जाए। न्याय और मुआवजा: पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक मुआवजा और सुरक्षा प्रदान की जाए। SIT का गठन: भूमि माफियाओं के खिलाफ विशेष जांच दल (SIT) बनाकर कार्रवाई की जाए। पेसा (PESA) कानून में संशोधन: संगठनों का आरोप है कि 23 दिसंबर 2025 को पारित पेसा नियमावली आदिवासियों की पारंपरिक ग्राम सभाओं के अनुरूप नहीं है। इसमें सुधार कर ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार दिए जाएं। भूमि सुरक्षा: CNT-SPT एक्ट का सख्ती से पालन हो और राज्य के भूमि घोटालों की जांच के लिए उच्चस्तरीय आयोग बने।

मशाल जुलूस से एकजुटता का संदेश

मशाल जुलूस की अगुवाई राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के राष्ट्रीय महासचिव जालेश्वर उरांव, जिलाध्यक्ष सोमदेव उरांव और केंद्रीय सरना समिति के संरक्षक मनि उरांव ने की। जुलूस के दौरान "जागो रूढ़िजन्य जनजाति जागो" जैसे नारों से पूरा शहर गूंज उठा।

आंदोलन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख चेहरे:

सोमे उरांव (उपाध्यक्ष, राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा) फूलकेशवर उरांव (जिला धर्मगुरु) बालमुकुंद लोहरा (प्रदेश अध्यक्ष, लोहरा समाज) जयंती उरांव (महिला प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष)

सरकार की नीतियों पर सवाल

आदिवासी नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान पेसा नियमावली से आदिवासियों की संस्कृति, सभ्यता और उनकी जमीन पर खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर त्वरित संज्ञान नहीं लिया, तो यह आंदोलन और भी उग्र होगा।

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"यह लड़ाई सिर्फ इंसाफ की नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, जमीन और हमारे पारंपरिक अधिकारों की रक्षा की है। इसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।" — आदिवासी नेतृत्व

बंद का असर और सुरक्षा व्यवस्था

शनिवार को बुलाए गए झारखंड बंद को देखते हुए पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर है। विभिन्न जिलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आदिवासी संगठनों ने आम जनता से बंद को सफल बनाने का समर्थन मांगा है, जिससे जनजीवन और परिवहन पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है।

News Nyx Jharkhand (न्यूज निक्स झारखण्ड)