झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती पेपर लीक का बड़ा पर्दाफाश: 166 आरोपी गिरफ्तार; सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड अतुल वत्स का नेटवर्क ध्वस्त, 10 लाख में होता था सौदेबाजी का खेल, जानिए कैसे काम करता था यह सिंडिकेट?

April 14, 2026
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झारखंड में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में सेंधमारी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 166 आरोपियों को गिरफ्तार कर सोमवार को रांची सिविल कोर्ट में पेश किया, जहाँ से सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। गिरफ्तार होने वालों में झारखंड के 139 और बिहार के 20 अभ्यर्थी शामिल हैं।

कैसे काम करता था यह सिंडिकेट? (10 लाख का रेट कार्ड)

पुलिस जांच में सॉल्वर गैंग के काम करने के चौंकाने वाले तरीके सामने आए हैं: डील की रकम: प्रत्येक अभ्यर्थी से परीक्षा पास कराने के नाम पर 10 लाख रुपये का सौदा किया जाता था। पेमेंट मोड: 3 लाख रुपये 'एडवांस' के तौर पर लिए जाते थे, जबकि बाकी 7 लाख रुपये रिजल्ट आने के बाद देने होते थे। सुरक्षा चक्र: गिरोह अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र (Original Certificates) अपने पास जमा कर लेता था, ताकि चयन के बाद कोई पैसे देने से मुकर न सके।

मास्टरमाइंड और मुख्य चेहरे

इस पूरे खेल का मुख्य संचालक अतुल वत्स (जहानाबाद निवासी) बताया जा रहा है। जांच में क्रिस्टोपर नामक व्यक्ति की भी अहम भूमिका सामने आई है, जिसने रड़गगांव की एक निर्माणाधीन बिल्डिंग में अभ्यर्थियों को ठहराने और उत्तर रटवाने की पूरी व्यवस्था की थी। पुलिस ने ठेकेदार की मिलीभगत की भी पुष्टि की है।

गिरफ्तारियों का भौगोलिक विवरण

इस नेटवर्क के तार कई राज्यों और जिलों से जुड़े हैं। पुलिस ने पटना से चुलबुल यादव को भी हिरासत में लिया है। गिरफ्तार अभ्यर्थियों का जिलावार विवरण नीचे दिया गया है:

झारखंड से कुल 139 अभ्यर्थी:

गिरफ्तार किए गए अभ्यर्थियों में झारखंड के विभिन्न जिलों की बड़ी भागीदारी रही है, जिसमें सबसे अधिक संख्या गिरिडीह (36) और हजारीबाग (32) जिलों से है। इसके अलावा रांची से 15, पलामू से 10, चतरा से 8, कोडरमा से 7, देवघर और बोकारो से 4-4, रामगढ़ से 3, तथा गढ़वा से 2 अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी हुई है। साथ ही, गोड्डा, लोहरदगा, जमशेदपुर, सरायकेला और लातेहार जिलों से भी 1-1 अभ्यर्थी शामिल हैं, जिससे कुल अन्य अभ्यर्थियों की संख्या 8 रही है।

बिहार से कुल 20 अभ्यर्थी:

भोजपुर: 06 (शशिकांत, दीपक, शुभम, राकेश, लाल बाबू, रवि) ​बक्सर: 03 (अभिषेक राय, सुजीत कुमार, अरविन्द कुमार) ​पटना: 02 (लवकुश कुमार, अंकित कुमार) ​नालंदा: 02 (उत्तम कुमार, विक्की कुमार) ​औरंगाबाद: 02 (ललेश कुमार, सरोज कुमार) ​अन्य: रोहतास, वैशाली, गया, भागलपुर, अरवल से 1-1 अभ्यर्थी।

एजेंटों का जाल और ठगी का तरीका

जांच में खुलासा हुआ कि यह गैंग एजेंटों के जरिए बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाता था। उन्हें सरकारी नौकरी का झांसा और हू-ब-हू प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने का लालच दिया जाता था। परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को सुरक्षित ठिकानों पर बुलाकर उत्तर रटवाए जाते थे।

पुलिस की चेतावनी

रांची पुलिस अभी भी इस मामले में सक्रिय है और कई अन्य संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह की जड़ें काफी गहरी हैं और आने वाले दिनों में कुछ और प्रभावशाली लोगों की गिरफ्तारी संभव है।

News Nyx विशेष:

पेपर लीक जैसे अपराध न केवल परीक्षा की शुचिता को भंग करते हैं, बल्कि मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ हैं। प्रशासन इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कानूनी कदम उठा रहा है।

रिपोर्ट: News Nyx ब्यूरो