झारखंड के स्कूलों में 'न्यूट्री-क्रांति': 8 जिलों के 60,000 बच्चों को मिड-डे मील में मिलेंगे कुकीज और न्यूट्री बार; कुपोषण पर सरकार का सीधा प्रहार; जानिए क्या है इस योजना में खास?

April 09, 2026
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रांची: झारखंड में कुपोषण और 'छिपी हुई भूख' (Hidden Hunger) को जड़ से मिटाने के लिए एक बेहद अनूठी और स्वास्थ्यवर्धक पहल शुरू की गई है। अब राज्य के सरकारी स्कूलों में बच्चों को सिर्फ दाल-चावल ही नहीं, बल्कि आयरन, जिंक और कैल्शियम से भरपूर न्यूट्री कुकीज और न्यूट्री बार भी दिए जाएंगे।

प्रमुख आकर्षण: क्या है इस योजना में खास?

लक्ष्य: 8 जिलों के 60,000 स्कूली बच्चों को कुपोषण मुक्त बनाना। फोकस: विशेष रूप से आदिम जनजाति (सबर, असुर, माल पहाड़िया) के बच्चे। सहयोग: हार्वेस्ट प्लस सॉल्यूशंस, JSLPS और भारतीय लोक कल्याण संस्थान की संयुक्त पहल। डाइट चार्ट: सप्ताह में 5 दिन बच्चों को मिलेंगे विशेष पोषक खाद्य पदार्थ।

इन 8 जिलों से शुरू हुआ अभियान

योजना के पहले चरण में राज्य के 24 प्रखंडों को कवर किया जा रहा है: रांची (राहे प्रखंड) | 2. पलामू | 3. पाकुड़ | 4. गुमला पूर्वी सिंहभूम | 6. सरायकेला-खरसावां | 7. सिमडेगा | 8. गोड्डा

न्यूट्री पाठशाला' और 'बायोफोर्टिफाइड' फसलें: एक नया नजरिया

यह सिर्फ भोजन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक बदलाव की तैयारी है: दीवारें बोलेंगी पोषण का पाठ: 'न्यूट्री पाठशाला' के तहत स्कूलों की दीवारों को रंगीन चित्रों से सजाया जाएगा, जो बच्चों को खेल-खेल में पोषक तत्वों की जानकारी देंगे। न्यूट्री डायरी: हर बच्चे की एक पर्सनल 'न्यूट्री डायरी' होगी, जिसमें उनके स्वास्थ्य और विकास का डेटा दर्ज किया जाएगा।

खेती से थाली तक:

जिंक वाला गेहूं-चावल, आयरन युक्त बाजरा और कैल्शियम से भरपूर रागी (मड़ुआ) की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन्हीं बायोफोर्टिफाइड फसलों से बच्चों के लिए कुकीज तैयार की जा रही हैं।

किसानों और समुदायों की भागीदारी

हार्वेस्ट प्लस की स्टेट कोऑर्डिनेटर नीलम भारती के अनुसार, इस योजना के जरिए स्थानीय किसानों को भी जोड़ा जा रहा है। पारंपरिक और लुप्त होते बीजों का संरक्षण कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। नुक्कड़ नाटकों और कठपुतली शो के जरिए गांवों में संतुलित आहार के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है।

News Nyx का नजरिया:

झारखंड जैसे राज्य में जहाँ कुपोषण एक बड़ी चुनौती है, वहां 'न्यूट्री बार' जैसी आधुनिक सोच और 'बायोफोर्टिफाइड' फसलों जैसी वैज्ञानिक तकनीक का मेल आने वाली पीढ़ी की नींव मजबूत करेगा। यह पहल 'स्वस्थ झारखंड' के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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