रामगढ़ में हाथियों का खूनी तांडव: तीन मजदूरों को दौड़ा-दौड़ा कर मारा, अवैध ईंट भट्ठों पर उठे सवाल

April 03, 2026
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रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला वन क्षेत्र में शुक्रवार की अहले सुबह हाथियों के एक झुंड ने जमकर उत्पात मचाया। इस दर्दनाक घटना में तीन लोगों की कुचलकर मौत हो गई, जबकि एक महिला गंभीर रूप से घायल है। घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत और प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।

प्रमुख बिंदु:

मृतक: युगल भुइयां (25 वर्ष), धीरज भुइयां (25 वर्ष) और शामदेव साव (73 वर्ष)। स्थान: गोला वन क्षेत्र के बांदा और मुरपा गांव। कारण: हाथियों का अचानक रास्ता बदलना और सुरक्षा अलर्ट का अभाव। विवाद: अवैध ईंट भट्ठों का संचालन और वन विभाग की कथित लापरवाही।

तड़के 3 बजे मौत बनकर आए हाथी

शुक्रवार सुबह करीब 3 बजे जब मजदूर बांदा गांव स्थित एक ईंट भट्ठे में सो रहे थे, तभी करीब 5 हाथियों के झुंड ने वहां हमला बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथियों ने मजदूरों को निशाना बनाकर उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर कुचला।

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इस हमले में कुजू निवासी युगल भुइयां और पतरातू के धीरज भुइयां की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, मुरपा गांव के शामदेव साव उस वक्त हमले की चपेट में आ गए जब वे जंगल में महुआ चुनने गए थे। धोरधोरिया क्षेत्र में एक महिला भी घायल हुई है जिसका उपचार जारी है।

वन विभाग और प्रशासन के खिलाफ फूटा गुस्सा

घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का सीधा आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की मौजूदगी की सूचना पहले से थी, लेकिन विभाग ने न तो गश्ती की और न ही ग्रामीणों को अलर्ट किया।

"यह महज एक हादसा नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की विफलता है। जब जान चली गई, तब विभाग सक्रिय हुआ है।" - स्थानीय ग्रामीण

इस त्रासदी ने क्षेत्र में फल-फूल रहे सैकड़ों अवैध ईंट भट्ठों की पोल खोल दी है। आरोप है कि इन भट्ठों में रजरप्पा और धवैया से अवैध रूप से लाया गया कोयला खपाया जाता है। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर घने जंगलों के पास चल रहे इन भट्ठों में मजदूरों की जान हमेशा जोखिम में रहती है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक ईंट भट्ठा संचालक आकाश करमाली को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

मुआवजा लेने से किया इनकार

तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने तत्काल ₹25,000 और भट्ठा संचालक ने ₹40,000 की सहायता राशि देने की पेशकश की, लेकिन परिजनों ने इसे लेने से साफ इनकार कर दिया। ग्रामीणों ने घंटों तक शवों को उठने नहीं दिया और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। बाद में पुलिस की समझौते के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

क्या कहता है विभाग?

वन विभाग के कर्मी निलेश पोद्दार और मनीष ने बताया कि हाथियों का यह झुंड अचानक रास्ता बदलकर रजरप्पा के रास्ते गोला क्षेत्र में प्रवेश कर गया था। विभाग अब हाथियों की मॉनिटरिंग कर रहा है ताकि उन्हें सुरक्षित वापस जंगल की ओर खदेड़ा जा सके।

रिपोर्ट: News Nyx ; स्थान: रामगढ़, झारखंड.