ओबीसी आरक्षण को 27% बहाल करने की मांग को लेकर रांची में कुशवाहा महासभा का महाधरना

December 11, 2025
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रांची के मोरहाबादी मैदान में कुशवाहा महासभा के बैनर तले ओबीसी आरक्षण को 27% बहाल करने की मांग को लेकर एक विशाल महाधरना आयोजित किया गया। इस धरने में कुशवाहा समाज के अलावा विभिन्न पिछड़ी जातियों के हजारों लोग एकजुट हुए और अपनी मांगों को लेकर सरकार को कड़ा संदेश दिया। महासभा का स्पष्ट मत है कि ओबीसी समुदाय को उनका संवैधानिक हक मिलना चाहिए और सरकार को इस दिशा में अविलंब उचित कदम उठाने चाहिए।

प्रमुख वक्ताओं ने सरकार को दी चेतावनी

धरने को संबोधित करते हुए कुशवाहा महासभा के प्रमुख नेता भुनेश्वर प्रसाद मेहता ने अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि पिछड़ी जातियों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग वर्षों से लंबित है और इसे तत्काल बहाल किया जाना चाहिए।

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मेहता ने झारखंड सरकार पर पिछड़ी जातियों की उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने याद दिलाया कि झारखंड राज्य के गठन से पहले यहाँ आबादी के अनुपात में 27 प्रतिशत आरक्षण था, जिसे बाद में घटाकर 14 प्रतिशत कर दिया गया। उन्होंने इस निर्णय को हर सरकार द्वारा पिछड़ों के साथ किया गया अन्याय बताया, जिसे अब और सहन नहीं किया जाएगा।

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उन्होंने घोषणा की कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो यह आंदोलन तेज किया जाएगा। इसी क्रम में, उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में रांची के मोरहाबादी मैदान में लाखों ओबीसी का ऐतिहासिक जुटान होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल कुशवाहा समाज का नहीं, बल्कि सभी पिछड़ी जातियों का सामूहिक आंदोलन है और मोरहाबादी मैदान से उठने वाली यह आवाज दिल्ली तक पहुंचेगी।

लैंड बैंक को रद्द करने और अन्य मांगे

ओबीसी आरक्षण के अलावा, भुनेश्वर प्रसाद मेहता ने पिछड़ों और अन्य विस्थापित समुदायों से जुड़ी कई अन्य महत्वपूर्ण समस्याओं को भी धरने में उठाया:

1.

भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013: उन्होंने मांग की कि इस अधिनियम को राज्य में पूर्ण रूप से लागू किया जाए।

2.

लैंड बैंक को रद्द करने की मांग: भाजपा सरकार द्वारा बनाए गए लैंड बैंक में दर्ज 21 लाख हेक्टेयर भूमि को तत्काल रद्द किया जाए। उनका तर्क है कि इस जमीन पर बड़ी संख्या में गरीब, आदिवासी और पिछड़े परिवार बसे हुए हैं।

3.

विस्थापितों के लिए स्वतंत्र नीति: उन्होंने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, रोजगार और मुआवजे के लिए एक स्वतंत्र नीति और एक अलग आयोग के गठन की भी मांग की।

4.

कृषि को उद्योग का दर्जा: कृषि क्षेत्र को उद्योग का दर्जा प्रदान किया जाए।

5.

नौकरियों में आरक्षण: भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के लिए संबंधित प्रतिष्ठानों में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

कार्यक्रम में उपस्थिति

इस महाधरने में पूर्व विधायक लोकनाथ महतो, जयप्रकाश वर्मा, बटेश्वर प्रसाद मेहता सहित कई अन्य समाजसेवी और हजारों की संख्या में ओबीसी समुदाय के लोग उपस्थित रहे, जिससे यह धरना एक विशाल शक्ति प्रदर्शन के रूप में सामने आया। महासभा ने साफ चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर यह आंदोलन राज्य भर में और अधिक उग्र रूप ले सकता है।

News Nyx Jharkhand (न्यूज निक्स झारखण्ड)